Vedanta के शेयरों में बुधवार को जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। एक वक्त तो हाल ऐसा था कि शेयर करीब 8 फीसदी गिरकर 421 रुपये तक पहुँच गया। वहीं Vedanta की दूसरी कंपनी Hindustan Zinc भी पीछे नहीं रही और उसके शेयर भी करीब 5 फीसदी टूट गए। अब सबको ये जानने की टेंशन हो गई कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि दोनों कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए। असल वजह निकली एक रिपोर्ट, जो Viceroy Research नाम की कंपनी ने निकाली। इस रिपोर्ट ने Vedanta और उसकी पेरेंट कंपनी Vedanta Resources यानी VRL पर कई बड़े आरोप लगा दिए हैं।
क्या है Viceroy की रिपोर्ट में
Viceroy की रिपोर्ट कहती है कि Vedanta Resources के पास खुद का कोई बड़ा बिजनेस नहीं है। वो तो पूरी तरह Vedanta Limited पर टिकी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि VRL लगातार Vedanta से पैसे खींच रही है ताकि अपना भारी-भरकम कर्ज चुका सके। इसके लिए Vedanta पर दबाव डाला जा रहा है कि वो ज्यादा कर्ज ले और अपने पास का पैसा खर्च करे। Viceroy का कहना है कि इस चक्कर में Vedanta की असली हालत कमजोर होती जा रही है। दरअसल Vedanta ही वो चीज है, जिसके दम पर VRL के कर्ज देने वाले लोग भरोसा कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यहां तक कहा गया कि VRL की ये पूरी चाल किसी Ponzi स्कीम जैसी लगती है, मतलब पुराने कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज लिया जा रहा है। और आखिर में इस चक्कर में नुकसान Vedanta के शेयर खरीदने वालों और VRL के कर्ज देने वालों को होगा। Viceroy ने साफ कहा कि पूरा ग्रुप जैसे-तैसे नए कर्ज, अकाउंटिंग की जोड़-तोड़ और छुपी हुई जिम्मेदारियों के सहारे टिका हुआ है।
पैसों के खेल पर सवाल
रिपोर्ट में एक और बड़ी बात कही गई कि Vedanta का ब्याज खर्च उसके बताए गए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। कंपनी ने कई जगह 9 से 11 फीसदी की ब्याज दर दिखाई है, लेकिन असल में खर्च 15 फीसदी के करीब बैठ रहा है। Viceroy ने ये भी कहा कि Vedanta ने अपनी कुछ कंपनियों की असली हालत छुपाई है और उनके बिजनेस की वैल्यू असल से ज्यादा दिखा दी है। कई खर्चों को मुनाफे में दिखा दिया गया है, जिससे ऐसा लग रहा है कि कंपनी अच्छा कमा रही है, जबकि सच कुछ और ही है।
रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि VRL, Vedanta और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों से करोड़ों डॉलर की ब्रांड फीस ले रही है, जिसका कोई बड़ा फायदा नहीं दिखता। Viceroy का दावा है कि VRL ने Vedanta से लिए पैसों का इस्तेमाल फिर Vedanta में ही अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कर लिया। साल 2020 में करीब 7,934 करोड़ रुपये का लोन Vedanta की कंपनियों से लिया गया और वो पैसा VRL ने अपने काम में लगा दिया, जो अभी तक वापस नहीं आया।
शेयर बाजार में खलबली
इतने सारे आरोपों के बाद Vedanta के शेयर में जबरदस्त गिरावट आ गई। Vedanta का शेयर इस साल अब तक करीब 6.7 फीसदी टूट चुका है। वहीं Hindustan Zinc का शेयर एक साल में ही 37 फीसदी गिर गया है और सिर्फ पिछले एक महीने में करीब 19 फीसदी कमजोर पड़ा है।
अब सबकी निगाह Vedanta पर
फिलहाल Vedanta ने Viceroy की इस रिपोर्ट पर कोई जवाब नहीं दिया है। सबको अब यही इंतजार है कि कंपनी इन आरोपों पर क्या कहती है। अगर Viceroy की बातों में सच्चाई निकली, तो ये Vedanta के निवेशकों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। इस समय तो सलाह यही दी जा रही है कि लोग सोच-समझकर ही कोई फैसला लें और जल्दबाज़ी में अपनी होल्डिंग्स ना बेचें या ना खरीदें।

